बनारस: बीएचयू के विश्वनाथ मंदिर परिसर में गुजरात दंगा प्रभावित गैंगरेप पीड़िता बिलक़ीस बानो के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान आयोजित हुआ। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के नाम पत्र भी लिखे गए। यह आयोजन जॉइंट ऐक्शन कमेटी बीएचयू और दखल संगठन के नेतृत्व में हुआ।
हस्ताक्षर अभियान स्थल पर हुई सभा में आयोजनकर्ताओं ने यह संदेश देने की पहल की कि यह मुहिम अन्याय के खिलाफ है और साथ ही साथ भारत को जोड़ने की भी अपील की गई। विश्वनाथ मंदिर प्रांगण से एक मुस्लिम महिला के हक़ में उठ रही आवाज अपने आप मे एक संपूर्ण भारत को दर्शाता है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखे पत्र में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मानित जीवन के अधिकार की पैरवी भी की।

बिलक़ीस बानो मामले में सरकार का कदम उसके बहुसंख्यकवादी एजेंडे के अनुरूप है और इसीलिए भाजपा नेताओं द्वारा इसकी प्रशंसा की जा रही है। साम्प्रदायिक नफरत भारत के लिए एक गंभीर चुनौती है। देखा जा रहा है कि कैसे सरकार द्वारा संस्थानों का इस्तेमाल भारत के लोगों की सेवा करने के बजाय अपने सांप्रदायिक एजेंडे को स्थापित करने और फैलाने के लिए किया जा रहा है।
सभा में शामिल सभी लोगों ने एक स्वर में कहा कि हम भारत के लोग सांप्रदायिक नफरत, हिंसा और जनविरोधी नीतियों की राजनीति को खारिज करते हैं। वक्ताओं ने कहा कि हम बिलकीस बानो के लिए न्याय चाहते हैं और सभी 11 दोषियों की समयपूर्ण रिहाई का फैसला वापस लेने की मांग करते हैं।

बता दें कि 27 फरवरी 2002 को गुजरात में साबरमती ट्रेन में आगजनी के बाद दंगे भड़क उठे थे। पूरा गुजरात साम्प्रदायिक दंगे की चपेट में आ गया था। पुलिस और अन्य सरकारी मशीनरी कुछ कर नही पा रही थीं। 3 मार्च को बिलक़ीस के घर हथियार से लैस दंगाई घुस गए। 5 माह की गर्भवती बिलक़ीस के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। तीन साल की बच्ची का सर दीवार पर पटककर उसकी हत्या कर दी गयी। परिवार के अन्य महिला सदस्यों के साथ भी बलात्कार किया गया और 17 परिवार सदस्यों में से 7 की हत्या की गई।
पुलिस ने केस दर्ज करने में काफी टालमटोल की। बाद में दबाव बढ़ने पर केस सीबीआई को दिया गया। सीबीआई ने अपनी जांच में पुलिस को केस खराब करने वाले के रूप में लिखा है। मानवाधिकार आयोग और सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद 2008 में सभी 11 आरोपियों को उम्र कैद की सजा हुई। लेकिन आश्चर्यजनक तरीके से इसी 15 अगस्त को इन बर्बर पाशवी प्रवृत्ति के लोगों को जेल से छोड़ दिया गया।

हस्ताक्षर अभियान और मार्च में प्रमुख रुप से नीति, रैनी, वंदना, प्रतीक, अर्चना, खुशी, यशी, पीयूष, निर्भय, रिषभ, विकास आनंद, मारुति मानव, धनञ्जय, अनुपम, चंदन, खेताराम, अभिनव, हर्षित, शांतनु, रजत आदि सैकड़ो की संख्या में छात्र युवा महिलाएं और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे।

