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अवैध विदेशी नागरिकों के लिए बनाएं डिटेंशन कैंप… गृह मंत्रालय ने राज्यों को दिया निर्देश

गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार, डिटेंशन कैंप में ऐसे लोगों को रखा जाएगा जिनकी नागरिकता पर शक हो या जो भारत में बिना कानूनी दस्तावेजों के रह रहे हों. उन्हें तब तक इन सेंटरों में रखा जाएगा, जब तक उन्हें उनके देश वापस नहीं भेजा जाता.

New Delhi: गृह मंत्रालय (MHA) ने मंगलवार को अधिसूचना जारी कर सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को अवैध विदेशी नागरिकों को रखने के लिए अलग से होल्डिंग सेंटर या डिटेंशन कैंप बनाने का आदेश दिया.

डिटेंशन कैंप में किसे रखा जाएगा?

गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार, डिटेंशन कैंप में ऐसे लोगों को रखा जाएगा जिनकी नागरिकता पर शक हो या जो भारत में बिना कानूनी दस्तावेजों के रह रहे हों. उन्हें तब तक इन सेंटरों में रखा जाएगा, जब तक उन्हें उनके देश वापस नहीं भेजा जाता.

गृह मंत्रालय के आदेश में क्या है?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, अधिसूचना में कहा गया कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन, जिला कलेक्टर या जिलाधिकारी यह तय कर सकते हैं कि कोई व्यक्ति इस कानून के तहत विदेशी है या नहीं. इस बारे में वो फैसला लेने के लिए फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल को भेज सकते हैं.

यह ट्रिब्यूनल अधिकतम तीन न्यायिक अनुभव वाले सदस्यों से मिलकर बनेगा, जिनकी नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी.

अगर कोई व्यक्ति यह साबित नहीं कर पाता कि वह विदेशी नहीं हैऔर वह जमानत भी नहीं करा पाता, तो उसे हिरासत में लेकर होल्डिंग सेंटर में रखा जाएगा.

गंभीर अपराध करने वालों के लिए ये नियम

गृह मंत्रालय ने कहा है कि अगर कोई विदेशी गंभीर अपराधों में दोषी पाया गया है, तो उसे भारत में प्रवेश या ठहरने की अनुमति नहीं दी जाएगी. साथ ही, मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि कोई भी विदेशी व्यक्ति भारत में किसी भी पर्वत चोटी पर चढ़ाई नहीं कर सकता या चढ़ाई की कोशिश नहीं कर सकता, जब तक कि उसे केंद्र सरकार से इसकी अनुमति न मिल जाए.

विदेशी नागरिकों को रोजगार देने के लिए भी ये आदेश

निजी क्षेत्र में विदेशी नागरिकों को रोजगार देने के लिए भी दिशानिर्देश जारी किए गए हैं. कोई भी विदेशी जिसके पास भारत में नौकरी के लिए वैध वीजा है वह बिना संबंधित सिविल अथॉरिटी की अनुमति के – बिजली, पानी, पेट्रोलियम जैसे क्षेत्रों में निजी कंपनियों में नौकरी नहीं कर सकता.

इसके साथ ही डिफेंस, स्पेस टेक्नोलॉजी, न्यूक्लियर एनर्जी या मानवाधिकार जैसे क्षेत्रों में निजी कंपनियां बिना केंद्र सरकार की इजाजत किसी भी विदेशी को जॉब नहीं दे सकतीं.

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