सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी कि ‘द वायर’ के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन और सलाहकार करण थापर को बड़ी राहत दी. कोर्ट ने दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 152 के तहत दर्ज की गई FIR में कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से असम पुलिस को रोक दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस मामले को 15 सितंबर तक स्थगित कर दिया. कोर्ट ने कहा कि इस बीच सिद्धार्थ वरदराजन और सलाहकार करण थापर के खिलाफ BNS की धारा 152 के तहत दर्ज FIR में कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी. हालांकि कोर्ट ने शर्त रखी कि वे जांच में शामिल होकर सहयोग करें.
‘असम पुलिस कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रही है’
पत्रकारों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन ने कहा कि असम पुलिस कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रही है. उन्होंने कहा कि मोरीगांव पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण प्रदान करने के न्यायालय के आदेश के बावजूद गुवाहाटी अपराध शाखा की ओर से दर्ज एक अन्य मामले में पत्रकारों को सम्मन जारी किया गया.
असम पुलिस ने भेजा था समन
बता दें कि बीते दिनों वरदराजन के लिए समन पुलिस इंस्पेक्टर सौमरज्योति रे ने BNSS की धारा 35(3) के तहत जारी किया है. यह समन गुवाहाटी के पानबाजार स्थित क्राइम ब्रांच में दर्ज एफआईआर संख्या 03/2025 से जुड़ा है, जिसमें धारा 152, 196, 197(1)(D)/3(6), 353, 45 और 61 लगाई गई है. द वायर की रिपोर्ट के मुताबिक, यह नया मामला असम पुलिस द्वारा दर्ज एक ताजा एफआईआर से जुड़ा है.
द वायर के ऑफिस में यह समन 14 अगस्त को मिला था. वहीं इसके बाद सोमवार, 18 अगस्त को करण थापर के नाम भी ठीक वैसा ही समन मिला, जो उसी एफआईआर से जुड़ा हुआ है.
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्टों के मुताबिक, असम की मोरीगांव पुलिस ने 11 जुलाई को वरदराजन और अन्य के खिलाफ BNS की धारा 152 के तहत कार्रवाई शुरू की थी. यह मामला ऑपरेशन सिंदूर के संबंध में द वायर द्वारा प्रकाशित लेख “भारतीय वायुसेना ने राजनीतिक नेतृत्व की बाध्यताओं के कारण पाकिस्तान से लड़ाकू विमान खोए: भारतीय रक्षा अधिकारी” के संबंध में दर्ज किया गया है.

