दिल्ली दंगों के एक मामले में ताहिर समेत 10 लोगों पर बिना सोचे समझे लगाई संगीन धारा, कोर्ट ने किया आरोपमुक्त

नई दिल्ली: उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे के एक मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने आप के पूर्व पार्षद रहे ताहिर हुसैन समेत दस लोगों को अचल संपत्ति में आगजनी के आरोप से मुक्त कर दिया है।

मिल्लत टाइम्स की खबर के अनुसार, सभी पर 2020 के नॉर्थ ईस्ट दिल्ली दंगों के एक मामले में ‘एक इमारत को नष्ट करने का आरोप था। हालांकि, कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशन जज पुलस्त्य प्रमाचला ने मामले को मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट को आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 427, 120 बी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत अन्य अपराधों के मुकदमे के लिए वापस भेज दिया।

इस मामले में कोर्ट का कहना है कि जय भगवान द्वारा की गई शिकायत के साथ-साथ उनके बयान, बिना किसी कल्पना के आईपीसी की धारा 436 के तहत अपराध को दर्शाता है। कोर्ट ने आदेश दिया कि यह स्पष्ट है कि इस मामले में बिना सोचे-समझे इस धारा को जोड़ा गया था। इसलिए, सभी आरोपी व्यक्तियों को धारा 436 आईपीसी के तहत अपराध से मुक्त किया जाता है।

कोर्ट ने दिल्ली दंगों के सिलसिले में कई मामलों का सामना कर रहे ताहिर हुसैन और अन्य मो. शादाब, शाह आलम, रियासत अली, गुलफाम, राशिद, मो. रिहान, मो. आबिद, अरशद कय्यूम और इरशाद अहमद को आईपीसी की धारा 436 के मामले में बरी कर दिया गया है।

दरअसल, 25 फरवरी, 2020 को दिल्ली पुलिस एक PCR कॉल के जरिए मिली शिकायत के बाद दयालपुर पुलिस स्टेशन में FIR संख्या 80/2020 दर्ज की गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि ताहिर हुसैन के घर की छत पर लगभग 100 लोग पेट्रोल बम लेकर खड़े थे और हिंदू समुदाय से संबंधित लोगों पर फेंक रहे थे।  शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया गया था कि उनके द्वारा कई घरों, दुकानों और सार्वजनिक संपत्तियों को क्षतिग्रस्त और जला दिया गया।

जब कोर्ट आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 436 के तहत आरोप तय करने के मामले पर विचार कर रहे थे, तब स्पेशल पब्लिक प्रोसिक्यूटर से मामले में अपराध को साबित करने वाले सबूतों के बारे में बताने के लिए कहा गया था, लेकिन उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले।

दिल्ली पुलिस द्वारा दायर मुख्य चार्जशीट और पहली सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर गौर करने के बाद कोर्ट ने कहा कि दंगों के दौरान हुई घटनाओं के बारे में सामान्य जानकारी को छोड़कर, “किसी विशेष घटना के बारे में कोई भी विचार नहीं किया जा सकता है। यह विशेष मामला दर्ज किया गया था और आरोप पत्र दायर किया गया था। इससे साफ ताहिर हुसैन समेत 9 लोगों के खिलाफ लगा आरोप झूठा था।

कोर्ट ने यह भी पाया कि शिकायत के समर्थन में “कई काट-छांट और सुधार” किए गए हैं. मार्च 2020 में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि दंगों के कारण, उसे अपनी बेटी की शादी के लिए खरीदे गए 35,000 रुपये के फर्नीचर का नुकसान हुआ। इसके बाद, उनका बयान 15 सितंबर 2021 को दर्ज किया गया, जिसमें उन्होंने अलग अलग आरोपीयों का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि वे पत्थर और पेट्रोल बम फेंक रहे थे।

कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता के आरोपों का फोकस यह रहा कि वह एक लोडिंग वाहन पर अपनी बेटी की शादी के लिए फर्नीचर के साथ-साथ अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान लेकर जा रहा था, जिसे करावल नगर रोड पर चांद बाग पुलिया के पास भीड़ ने रोका और इसके बाद उस वाहन में रखे सभी सामान सड़क पर फेंक दिया।

बता दें कि आईपीसी की धारा 436 में पूजा स्थल के रूप में या मानव निवास के रूप में या संपत्ति की अभिरक्षा के स्थान के रूप में उपयोग की जाने वाली किसी भी इमारत को नष्ट करने के इरादे से आग या किसी विस्फोटक पदार्थ से शरारत करने वाले को सजा देने का प्रावधान है। इस मामले में अपराध सिद्ध होने पर आजीवन कारावास या 10 साल तक की कैद और जुर्माने का दंड ह। लेकिन इस धारा के तहत ताहिर हुसैन पर आरोप सिद्द नहीं हो सके, इसी कारण कोर्ट ने इस मामले से उन्हें और 9 लोगों को बरी कर दिया।

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