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वक़्फ़ संसोधन विधेयक का समर्थन करने पर NDA के कई शीर्ष नेताओं ने दिया इस्तीफा.. यहां देखें पूरी लिस्ट

वक़्फ़ संसोधन विधेयक का समर्थन करने पर JDU, RLD और बीजू जनता दल के कई नेता नाराज हो गए हैं. इसके साथ ही कई नेताओं ने अपनी पार्टियों पर आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया है.

Waqf Amendment Bill: वक़्फ़ संसोधन विधेयक दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा से पास हो चुका है. एनडीए गठबंधन के सहयोगी दलों ने इस बिल के समर्थन में वोट दिया है. लोकसभा में इस विधेयक के पक्ष में 288 और इसके खिलाफ 232 वोट डाले गए थे. वहीं राज्यसभा में इसके पक्ष में 128 और विपक्ष में 95 वोट डाले गए. एनडीए गठबंधन के सहयोगी पार्टियों द्वारा इस विधेयक का समर्थन करने पर कई नेता और खासकर मुस्लिम नेता नाराज हो गए हैं. इसके साथ ही अपनी पार्टियों पर कई तरह के आरोप लगाते हुए इस्तीफा दे दिया. तो आईए जानते हैं कि किस पार्टी से किन-किन नेताओं ने इस्तीफा दे दिया है.

JDU के इन मुस्लिम नेताओं ने दिया इस्तीफा

वक़्फ़ संसोधन विधेयक का समर्थन करने पर सबसे पहले जनता दल यूनाइटेड (JDU) के कई शीर्ष मुस्लिम नेताओं ने इस्तीफा दे दिया. लोकसभा में वक्फ संसोधन विधेयक का समर्थन करने पर जेडीयू के सीनियर नेता और 21 ढाका के विधानसभा प्रत्याशी डॉ मोहम्मद कासिम अंसारी, अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश सचिव मो. नवाज मलिक और JDU के अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव मोहम्मद तबरेज सिद्दीकी अलीग ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया.

मो. तबरेज सिद्दीकी अलीग ने आगे कहा कि जिस मुस्लिम समाज ने पिछले 19 साल से जदयू का समर्थन किया इसी के खिलाफ निर्णय में पार्टी ने समर्थन किया. यह समर्थकों के साथ विश्वासघात है. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में इसका असर दिखेगा.

RLD के शाहजेब रिजवी ने दिया इस्तीफा

वहीं आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी ने वक्फ बिल का समर्थन किया था. इसके बाद पार्टी के प्रदेश महासचिव और बड़े मुस्लिम नेता शाहजेब रिजवी ने शुक्रवार, 4 अप्रैल को पार्टी से इस्तीफा दे दिया. शाहजेब रिजवी ने पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुसलमानों ने उन्हें झोली भर के वोट दिया, और वक्त आने पर उन्होंने साथ नहीं दिया है. इसके साथ ही शाहजेब रिजवी ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा कि सेक्युलर कहलाना बड़ा आसान है, पर सेक्युलर होना बहुत मुश्किल है.

बीजू जनता दल के कई नेता नाराज

दोनों पार्टियों के अलावा, बीजू जनता दल ने वक़्फ़ संसोधन विधेयक के सदन में पेश होने से पहले पार्टी के नेताओं के साथ मीटिंग की थी, इस दौरान उन्होंने ऐलान किया था कि उनकी पार्टी सदन में वक़्फ़ बिल का मजबूती के साथ विरोध करेगी. लेकिन सदन में वोटिंग से पहले पार्टी ने अपनी रुख बदल लिया, और सांसदों को अपने विवेक और बुद्धि के आधार पर वोटिंग करने का सुझाव दिया. वक़्फ़ बिल पर बेजेडी के इस स्टैंड से पार्टी के कई नेता नाखुश हैं, ओडिशा विधानसभा में बीजेडी के उपनेता प्रसन्ना आचार्य, पूर्व मंत्री भूपिंदर सिंह और अशोक पांडा, पूर्व सांसद चंद्रशेखर साहू और पार्टी के अन्य नेताओं ने मीटिंग के बाद कहा कि वह पार्टी प्रमुख नवीन पटनायक से मिलकर इस मुद्दे को उठाएंगे.

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