विधानसभा चुनाव में बेरोज़गारी, शिक्षा, और स्वास्थ्य जैसी समस्याओं पर बात ज़रूरी : जमाअत इस्लामी हिन्द

‘विधानसभा चुनाव में बेरोज़गारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं महिला सशस्कतीकरण जैसे वास्तविक समस्याओं पर भी ज़ोर दिया जाना चाहिए. अवाम को चाहिए कि वे ऐसे लोगों का साथ दें जो सम्मानित प्रदेश, लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान, न्याय और भाईचारा, साम्प्रदायिक सौहार्द्र और सहनशीलता के लिए संघर्ष करते हों’ ये बातें जमाअत इस्लामी हिन्द के उपाध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने जमाअत द्वारा आयोजित वर्चुअल प्रेस कान्फ्रेंस में कही.

केंद्रीय बजट पर सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र और अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए सुनिश्चित किए गए फंड बहुत कम हैं. शिक्षा क्षेत्र के लिए फंड में बढ़ोतरी के बावजूद हम अब भी सकल घरेलू उत्पाद का छह फीसद प्रस्तावित लक्ष्य तक पहुंचने से बहुत दूर हैं. यह बजट आम आदमी के अपेक्षा कॉर्पोरेट के हितों के पक्ष में अधिक है. इस में आम आदमी को कर में कोई राहत नहीं दी गयी है. ग्रामिण रोजगार योजना ‘मनरेगा’ के बजट को कम करना चिंताजनक है.

प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने ‘ऑक्सफैम रिपोर्ट’ का हवाला देते हुए कहा कि जब देश में 84 प्रतिशत परिवारों को एक वर्ष में अपनी आय में भारी गिरावट का सामना करना पड़ जाये, उस समय भारत के 100 सबसे अमीर लोगों की सामूहिक संपत्ति 2021 में 5703 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई. यह रिपोर्ट हमारे देश में आमदनी के बटवारे में बड़े पैमाने पर होने वाले अंतर को उजागर करता है.

इस अवसर पर जमाअत के राष्ट्रीय सचिव मलिक मोतसीम खान ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश में कुछ लोगों की तरफ से प्रदर्शनों और विकास के योजनाओं को गिनाने के बजाए धार्मिक आधार पर समुदायों को बांटने वाले मुद्दों को उठाने की कोशिश की जा रही है. ऐसे लोगों की पार्टियों को सत्ता से दूर रखना देश के हित में है.

उन्होंने कहा कि अवाम धर्म और जाति से उपर उठकर उम्मीदवार के नैतिकता और चरित्र को देखकर वोटिंग करें और वे पार्टियां जो नफरत को बढ़ावा देती हैं और उनके पास कोई व्यापक योजना नहीं है उन्हें चुनाव में पराजित करें. मलिक मोतसिम खान ने ओवैसी पर हुए कथित हमले की कड़ी निन्दा भी की.

जमाअत इस्लामी हिन्द की राष्ट्रीय सचिव रहमतुन्निसा ने कर्नाटक में छात्राओं के साथ हुए स्कार्फ के मुद्दे पर सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि इस तरह का मुद्दा यदा कदा देश के अन्य राज्यों में उठता रहता है जो एक लोकतांत्रिक देश के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं. यहां का संविधान सभी को मौलिक अधिकार देता है कि वे अपनी मर्जी का वस़्त्र धारण करें. मगर कुछ लोग वस्त्र को एक समुदाय के साथ जोड़ कर राजनीतिक और साम्प्रदायिक मुद्दा बनाना चाहते हैं. इस तरह की कोशिशों पर रोक लगाई जानी चाहिए. अगर ज़रूरत पड़ी तो हम देश की शान्ति के लिए चिंतित नागरिकों के साथ मिलकर क़ानूनी रास्ता अपना सकते हैं.

कान्फ्रेंस में बिहार और उत्तरप्रदेश में रेलवे में भर्ती से सम्बंधित कथित अनियमित्ताओं के खिलाफ छात्रों के विरोध प्रदशर्नों पर भी चर्चा की गई. जमाअत नें मांग की कि रेल मंत्री के वादे के मुताबिक़ सरकार छात्रों की शिकायतों को दूर करे और परीक्षाओं में अनियमित्ताओं को यक़ीनी तौर पर दूर करे. छात्रों के साथ बिना किसी पक्षपात के न्यायपूर्ण व्यवहार करे.

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