383 Aid Workers killed in last one year: संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के चीफ टॉम फ्लेचर ने दुनिया भर में राहतकर्मियों (Aid Workers) की हत्याओं पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी और उदासीनता पर एक शर्मनाक घटना बताया.
विश्व मानवीय दिवस के मौके पर टॉम फ्लेचर ने बताया कि पिछले साल दुनिया भर में 383 राहत कर्मियों की हत्या हुई, जो पिछले साल की तुलना में 31 फीसदी ज्यादा है. उन्होंने कहा कि यह वृद्धि गाजा और सूडान में जारी हिंसक संघर्ष के कारण हुई है. गाजा में सिर्फ 181 मानवीय कार्यकर्ता मारे गए वहीं सूडान में 60 राहतकर्मियों की जान जा चुकी है.
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के चीफ फ्लेचर ने कहा कि ये आंकड़े दिखाते हैं कि जिन लोगों की जिम्मेदारी जान बचाने की होती है, वे खुद सबसे बड़े खतरे में हैं, और यह हालात पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है.
‘राहत कर्मियों पर हमला सभी लोगों पर हमला’
टॉम फ्लेचर ने भावुक होते हुए कहा कि राहत कार्य करने वाले किसी एक सहयोगी पर हमला, हम सभी और उन लोगों पर हमला है जिनकी हम सेवा करते हैं. उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के बड़े पैमाने पर हमले और कोई जवाबदेही न होना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी और उदासीनता का शर्मनाक प्रमाण है.
संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि अधिकतर मारे गए राहतकर्मी स्थानीय कर्मचारी थे, और वे या तो काम करते समय या अपने घरों में हमले का शिकार बने.
फ्लेचर ने की यह मांग
फ्लेचर ने कहा कि हम मानवीय समुदाय के रूप में एक बार फिर मांग करते हैं कि जिनके पास शक्ति और प्रभाव है, वे मानवता के लिए आगे आएं. आम नागरिकों और राहतकर्मियों की सुरक्षा करें और हमलावरों को सजा दिलाएं.
पिछले साल 293 राहत कर्मियों की हुई थी हत्या
एड वर्कर सिक्योरिटी डेटाबेस ने बताया है कि 2023 में 293 राहतकर्मियों की हत्या हुई थी, जबकि 2024 में यह संख्या और बढ़ गई है. इस साल के 14 अगस्त तक के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 265 राहतकर्मी मारे जा चुके हैं.
बता दें कि इस साल 23 मार्च को राहत कर्मियों पर सबसे बड़ा हमला हुआ, जहां गाजा के दक्षिणी शहर राफा में इजराइली सैनिकों ने गोलियां चला दीं. इस हमले में 15 मेडिकल स्टाफ और इमरजेंसी रिस्पॉन्डर्स की मौत हो गई.