Asaduddin Owaisi On Malegaon Blast Case 2008: मालेगांव ब्लास्ट मामले में कोर्ट ने बीजेपी के पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर और कर्नल पुरोहित समेत सभी 7 आरोपियों को आज यानी कि गुरूवार, 31 जुलाई को बरी कर दिया. मस्जिद के सामने हुए ब्लास्ट मामले के सभी आरोपियों के बरी होने पर AIMIM चीफ और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस फैसले को निराशजनक बताया. साथ ही कहा कि क्या केंद्र की मोदी सरकार और फडणवीस सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगी..
‘अभियोजन पक्ष आरोपियों के बरी होने का जिम्मेदार’
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि मालेगांव ब्लास्ट मामले का फैसला निराशाजनक है. इस धमाके में छह नमाजी मारे गए और लगभग 100 घायल हुए थे. उन्हें उनके धर्म के कारण निशाना बनाया गया था. उन्होंने कहा कि एनआईए ने इस मामले में जानबूझकर घटिया जांच की है. अभियोजन पक्ष ही आरोपियों के बरी होने के लिए जिम्मेदार है.
‘क्या केंद्र की मोदी और फडणवीस सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी?’
AIMIM सांसद ने आगे कहा कि इस धमाके के 17 साल बाद अदालत ने सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया. क्या केंद्र की मोदी सरकार और फडणवीस सरकार इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी, जिस तरह उन्होंने मुंबई ट्रेन विस्फोटों में आरोपियों को बरी करने पर रोक लगाने की मांग की थी.. क्या महाराष्ट्र के “धर्मनिरपेक्ष” राजनीतिक दल जवाबदेही की मांग करेंगे? उन छह लोगों की हत्या किसने की?
तत्कालीन अभियोजक रोहिणी सालियान के बयान का किया जिक्र
ओवैसी ने कहा कि 2016 में मामले की तत्कालीन अभियोजक रोहिणी सालियान ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि एनआईए ने उनसे आरोपियों के प्रति “नरम रुख” अपनाने को कहा था. इसके बाद 2017 में एनआईए ने साध्वी प्रज्ञा को बरी करवाने की कोशिश की थी. वही 2019 में बीजेपी की सांसद बनी.
असदुद्दीन ओवैसी ने यह भी कहा कि करकरे ने मालेगांव में हुई साजिश का पर्दाफाश किया था, लेकिन दुर्भाग्य से 26/11 के हमलों में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने उन्हें मार डाला. बीजेपी सांसद ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्होंने करकरे को श्राप दिया था और उनकी मृत्यु उसी श्राप के कारण हुई.
‘ANI और ATS के अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा?’
ओवैसी ने आगे सवाल करते हुए कहा कि एनआईए या एटीएस अधिकारियों को उनकी दोषपूर्ण जांच के लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा? मुझे लगता है कि हम इसका उत्तर जानते हैं. यह आतंकवाद के खिलाफ सख्त मोदी सरकार है. दुनिया याद रखेगी कि बीजेपी ने एक आतंकवाद के आरोपी को सांसद बनाया.
1. The Malegaon blast case verdict is disappointing. Six namazis were killed in the blast and nearly 100 were injured. They were targeted for their religion. A deliberately shoddy investigation/prosecution is responsible for the acquittal.
2. 17 years after the blast, the Court…— Asaduddin Owaisi (@asadowaisi) July 31, 2025
कब हुआ था ब्लास्ट, कितने लोग मारे गए थे?
बता दें कि महाराष्ट्र का चर्चित मालेगांव ब्लास्ट 29 सितंबर 2008 को रमजान के महीने में हुआ था. मालेगांव में मस्जिद के सामने करीब 9:35 बजे जोरदार बम धमाका हुआ था. इस धमाके में 6 लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि 100 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए थे.
इन छह मुस्लिमों की धमाके से हुई थी मौत
इस ब्लास्ट में सैय्यद अजहर (19 साल), मुश्ताक शेख यूसुफ (24 साल), शेख रफीक शेख मुस्तफा (42 साल) फरहीन उर्फ शगुफ्ता शेख लियाकत (20 साल) इरफाल जियाउल्ला खान (20 साल) और हारुन मोहम्मद शाह (70 साल) मारे गए थे.
मालेगांव ब्लास्ट मामले की जांच पहले महाराष्ट्र एटीएस ने की और बाद में इसे एनआईए को सौंप दिया गया. एनआईए की रिपोर्ट के मुताबिक 2008 मालेगांव ब्लास्ट में इस्तेमाल हुई मोटरसाइकिल पूर्व सांसद प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर रजिस्टर्ड थी.

