Saudi Arabia News: सऊदी अरब की सरकार ने एक खास कदम उठाते हुए महिलाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में बेहतरीन काम किया है. प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के रॉयल रिजर्व ने मिडिल ईस्ट की पहली “महिला मरीन रेंजर” टीम की शुरूआत की है. इसकी शुरूआत विश्व रेंजर दिवस के अवसर पर की गई है. इसके तहत अब महिला रेंजर समुद्र की निगरानी करेंगी.
अरब न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, नए मरीन रेंजर्स रिजर्व टीम में 246 मेंबर हैं, जिनमें से 34 फीसदी महिलाएं हैं. यह पुरूष रेंजरों और सऊदी बॉर्डर गार्ड यूनिट के साथ रिजर्व के 170 किलोमीटर लंबे लाल सागर तट पर गश्त करेंगी.
‘हमें महिला रेंजर्स पर गर्व है’
अरब न्यूज के हवाले से रिजर्व के सीईओ एंड्रयू जालोमिस ने बताया कि सात अद्भूत महिलाएं महिला मरीन रेंजर्स के पहले ग्रुप में शामिल हैं और हमें उनपर गर्व है.
महिला रेंजर रुकय्या ने क्या कहा ?
रुकय्या अल-बलावी पहली महिला हैं, जो पहले भर्ती दल का हिस्सा थीं, अब योग्य मरीन रेंजर हैं. उन्होंने कहा कि मैंने समुद्र के भीतर एक बिल्कुल नई दुनिया देखी है. मुझे गर्व है कि मैं तैराकी सीखने वाली पहली महिलाओं में से हूं. उन्होंने आगे कहा कि मैं उस दिन का सपना देख रही हूं जब एक महिला रिजर्व की समुद्री गश्ती नाव की कप्तान बनेगी.
महिला समुद्री रेंजरों का मुख्य काम क्या होगा?
महिला समुद्री रेंजरों का मुख्य काम तटरेखा पर गश्त करना, समुद्री जीवन की निगरानी करना, पर्यावरणीय नियमों को लागू करना और समुद्री अनुसंधान एवं पारिस्थितिकी तंत्र बहाली प्रयासों में योगदान देना शामिल है.
कैसे होती है ट्रेनिंग?
बता दें कि सभी रेंजरों को कठोर ट्रेनिंग दिया जाता है, जिसमें प्राथमिक चिकित्सा, आत्मरक्षा (सेल्फ डिफेंस), संरक्षण तकनीकें, गश्त और पारिस्थितिक (Ecology) निगरानी शामिल है.
मरीन रेंजर्स बनने के लिए, महिलाओं को एक गहन तैराकी प्रोग्राम पूरा करना होता है. इसके बाद उनका फिटनेस टेस्ट होता है.
लैंगिक असमानता दूर करने की दिशा में एक खास पहल
एंड्रयू जालोमिस ने कहा कि यह संरक्षण के ऐतिहासिक क्षेत्रीय और वैश्विक लैंगिक असमानता को दूर करने की दिशा में एक खास पहल है. वर्ल्ड लेवल पर केवल 11 प्रतिशत रेंजर महिलाएं हैं और ब्लू इकॉनमी (महासागरीय अर्थव्यवस्था) में काम करने वालों में केवल 1 प्रतिशत महिलाएं हैं.

