Gauhati High Court On Assam Government: असम की बीजेपी सरकार ने अडानी ग्रुप को सीमेंट फैक्ट्री के लिए 1875 एकड़ (लगभग 3000 बीघा) जमीन देने का फैसला किया है. इस मामले पर स्थानीय लोगों ने हिमंता सरकार के फैसले के खिलाफ गुवाहाटी हाईकोर्ट में याचिका दायर की है. याचिका पर हाईकोर्ट ने असम के दीमा हसाओ जिले के उमरंगसो इलाके में महाबल सीमेंट्स को लगभग 3,000 बीघा जमीन फैक्ट्री और खनन गतिविधियों के लिए दिए जाने पर गहरी चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा कि यह इलाका पर्यावरण के लिहाज से बेहद संवेदनशील है और यहां रहने वाले आदिवासी समुदायों के अधिकारों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
बता दें कि गुवाहटी हाईकोर्ट में एक याचिका कंपनी की ओर से और दूसरी स्थानीय लोगों की ओर से दायर की गई है. स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्हें उन्हें उनकी वैध जमीन से बेदखल कर दिया गया है.
कोर्ट ने पॉलिसी दस्तावेज पेश करने का दिया आदेश
इन याचिकाओ पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय कुमार मेधी ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में जमीन देना “असाधारण” फैसला है और इससे जनहित से जुड़े सवाल उठते हैं. उन्होंने NCHAC (नॉर्थ कछार हिल्स ऑटोनोमस काउंसिल) के वकील श्री सी. शर्मा को निर्देश दिया कि वह वह पॉलिसी दस्तावेज कोर्ट में पेश करें, जिनके आधार पर इतनी जमीन दी गई.
इस मामले की सुनवाई के दौरान गुवाहाटी हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि 3,000 बीघा, पूरा जिला दे दिया क्या? ये कैसा फैसला है? आपकी जरूरत मुद्दा नहीं है, जनहित असली मुद्दा है.
असम सरकार ने अदानी सीमेंट के लिए
3000 बीघा जमीन देने का फैसला किया हैजब मामला हाई कोर्ट में पहुंचा
तब जज साहब हैरान रह गए3000 बीघा पूरा जिला 🤯
वह भी आदिवासियों की जमीन
यह किस तरह का फैसला है !!! pic.twitter.com/4tlXDzFhTS— Atul Londhe Patil (INDIA Ka Parivar)🇮🇳 (@atullondhe) August 18, 2025
कंपनी ने क्या कहा?
कंपनी के वकील ने दलील दी कि यह जमीन बंजर है और उनके काम के लिए जरूरी है. लेकिन कोर्ट ने इस पर भी सवाल उठाया कि यह इलाका छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में आता है, जहां आदिवासी समुदायों के अधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि उमरंगसो एक संवेदनशील पर्यावरणीय क्षेत्र है, जहां गर्म पानी के झरने, प्रवासी पक्षी और वन्यजीव पाए जाते हैं. ऐसे क्षेत्र में जमीन देना और भी चिंताजनक है.

