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गाजा में मारे गए पत्रकारों के लिए दुनिया भर के मीडिया ने उठाई आवाज.. मीडिया संस्थानों ने की अहम मांग

पत्रकारों की हत्या के खिलाफ ये प्रदर्शन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) और Avaaz नाम के एक्टिविस्ट प्लेटफॉर्म द्वारा मिलकर आयोजित किया गया. इसके तहत 50 से ज्यादा देशों में अखबारों के पहले पन्नों को काला किया गया.

Gaza: गाजा में हो रहे पत्रकारों की हत्या के खिलाफ रविवार को दुनियाभर के सैकड़ों मीडिया संगठनों ने प्रदर्शन किया. मीडिया संस्थानों ने चेतावनी दी कि अगर इसी रफ्तार से पत्रकार मारे जाते रहे, तो जल्द ही गाजा से रिपोर्ट करने वाला कोई नहीं बचेगा.

पत्रकारों की हत्या के खिलाफ ये प्रदर्शन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) और Avaaz नाम के एक्टिविस्ट प्लेटफॉर्म द्वारा मिलकर आयोजित किया गया. इसके तहत 50 से ज्यादा देशों में अखबारों के पहले पन्नों को काला किया गया, न्यूज वेबसाइट्स पर विशेष बैनर लगाए गए और रेडियो-टीवी चैनलों ने भी खास संदेश प्रसारित किए.

इजराइली हमलों में 220 पत्रकार मारे जा चुके हैं

मीडिया संगठनों ने रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पिछले दो सालों में गाजा में इजराइली हमलों में 220 पत्रकार मारे जा चुके हैं, जिनमें सिर्फ 10 अगस्त को एक ही हमले में अल जजीरा के संवाददाता अनस अल-शरीफ समेत 6 पत्रकार मारे गए थे. इसके बाद 25 अगस्त को हुए हमलों में 5 और पत्रकारों की मौत हुई.

गाजा के गवर्नमेंट मीडिया ऑफिस के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2023 से अब तक इजराइली हमलों में 246 पत्रकारों की जान जा चुकी है.

मीडिया संस्थानों ने प्रदर्शन करते हुए कहा तीन अहम मांग की.

  • फिलिस्तीनी पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उन पर हमले करने वालों को सजा मिले. हमलों को यूं ही नजरअंदाज न किया जाए.
  • विदेशी पत्रकारों को गाजा में स्वतंत्र रूप से रिपोर्टिंग करने की अनुमति दी जाए.
  • जिन फिलिस्तीनी पत्रकारों को वहां से बाहर निकलने की जरूरत है, उनके लिए आपातकालीन वीजा की व्यवस्था की जाए.

RSF ने की ये मांग

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) ने एक बयान में कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक शुरू होने में अब सिर्फ आठ दिन बचे हैं, ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए. हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से अपील करते हैं कि वह इजराइली सेना द्वारा पत्रकारों पर किए जा रहे अपराधों को रोके.

भारत के मीडिया संस्थान हुए शामिल

इस अभियान में भारत के द वायर और द क्विंट, अमेरिका से एनपीआर, कतर से अल जजीरा और स्पेन से एल पैस मीडिया संस्थान शामिल हुए. इनके अलावा लैटिन अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और एशिया के कई क्षेत्रीय और खोजी पत्रकारिता करने वाले न्यूजरूम्स ने भी इस coordinated विरोध प्रदर्शन में भाग लिया.

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