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बांग्लादेश चुनाव से पहले पूर्व पीएम शेख हसीना को लगा बड़ा झटका, निर्वाचन आयोग ने वोट देने से रोका

बांग्लादेश के चुनाव आयोग (EC) ने बुधवार को कहा कि उसने हटाई गई प्रधानमंत्री शेख हसीना के राष्ट्रीय पहचान पत्र (National Identity Cards) को "लॉक" कर दिया है.

Bangladesh: बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना अगले साल फरवरी में होने वाले चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगी. बांग्लादेश के चुनाव आयोग (EC) ने बुधवार को कहा कि उसने हटाई गई प्रधानमंत्री शेख हसीना के राष्ट्रीय पहचान पत्र (National Identity Cards) को “लॉक” कर दिया है. इसका मतलब है कि अब वह अगले साल फरवरी में होने वाले आम चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगी.

शेख हसीना का NID लॉक

बांग्लादेश चुनाव आयोग के सचिव अख्तर अहमद ने निर्वाचन भवन में पत्रकारों से कहा कि जिस किसी का राष्ट्रीय पहचान पत्र (NID) लॉक कर दिया गया है, वह विदेश से वोट नहीं डाल सकता. उनका (हसीना) का NID लॉक कर दिया गया है. अख्तर अहमद ने किसी और का नाम नहीं लिया.

परिवार के कई सदस्यों को वोट देने से रोक

UNB न्यूज एजेंसी और ढाका ट्रिब्यून अखबार ने बिना नाम बताए चुनाव आयोग के अधिकारियों के हवाले से बताया कि शेख हसीना की छोटी बहन शेख रेहाना, बेटे सजीब वाजेद जॉय और बेटी सायमा वाजेद पुतुल के NID भी “लॉक” या “ब्लॉक” कर दिए गए हैं.

बांग्लादेश के अखबारों के मुताबिक, शेख हसीना की छोटी बहन रेहाना के बच्चों तुलिप रिजवाना सिद्दीकी, अजमीना सिद्दीकी और उनके भतीजे रादवान मुजीब सिद्दीकी बॉबी, उनके बहनोई और शेख हसीना के पूर्व सुरक्षा सलाहकार रिटायर्ड मेजर जनरल तारिक अहमद सिद्दीकी, उनकी पत्नी शाहिन सिद्दीकी और उनकी बेटी बुशरा सिद्दीकी को भी वोट देने से रोका गया है.

चुनाव आयोग के सचिव अख्तर अहमद ने ये भी कहा कि जो लोग न्याय से बचने के लिए या किसी और कारण से विदेश भाग गए हैं, वे भी वोट डाल सकते हैं, अगर उनके NID कार्ड एक्टिव हैं.

छात्र आंदोलन के बाद गिरी है हसीना की सरकार

बता दें कि छात्रों आंदोलन के आंदोलन के बाद शेख हसीना की अवामी लीग सरकार को 5 अगस्त 2024 को हटा दिया गया था. रिपोर्टों के मुताबिक, इसके बाद शेख हसीना भारत भाग आई थी.

अवामी लीग की सरकार खत्म होने के बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार (चीफ एडवाइजर) का कार्यभार संभाला. इसके बाद उन्होंने शेख हसीना व अन्य वरिष्ठ अवामी लीग नेताओं पर मानवता के खिलाफ अपराध समेत कई आरोपों के चलते पार्टी की गतिविधियों पर रोक लगा दी गई और उनके खिलाफ मुकदमा लंबित कर दिया गया.

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