न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) ने प्रमुख मीडिया संस्थान ज़ी न्यूज़ और टाइम्स नाउ नवभारत को निर्देश दिया है कि वे “मेहंदी जिहाद” और “लव जिहाद” पर किए गए इस्लामोफोबिक (इस्लाम विरोधी) कंटेंट वाले वीडियो हटा दें. NBDSA ने सीधे तौर पर कहा कि इस तरह की रिपोर्टिंग प्रसारण के नैतिक मानकों का उल्लंघन है.
क्या है पूरा मामला?
NBDSA ने पत्रकार और मीडिया शोधकर्ता इंद्रजीत घोरपड़े की शिकायत के बाद ज़ी न्यूज़ और टाइम्स नाउ नवभारत को “मेहंदी जिहाद” और “लव जिहाद” पर किए गए इस्लामोफोबिक कंटेंट हटाने का आदेश दिया है. इंद्रजीत घोरपड़े ने इन दोनों न्यूज चैनलों पर मुसलमानों के खिलाफ सांप्रदायिक नफरत फैलाने का आरोप लगाया था.
ज़ी न्यूज़ ने क्या खबर चलाई थी?
रिपोर्टों के मुताबिक, शिकायत में कहा गया था कि ज़ी न्यूज़ ने ऐसी रिपोर्टें दिखाई थीं जिनमें दावा किया गया कि मुस्लिम पुरुष मेहंदी कलाकार बनकर हिंदू महिलाओं की मेहंदी पर थूकते हैं और इस मौके का इस्तेमाल जबरन धर्म परिवर्तन के लिए करते हैं. साथ ही चैनल ने ऐसे हेडलाइंस भी चलाए जो मुस्लिम समुदाय के मेहंदी कलाकारों के बहिष्कार को बढ़ावा देते थे.
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये आरोप
वहीं टाइम्स नाउ नवभारत ने बरेली के एक कथित “लव जिहाद” मामले की रिपोर्टिंग की, जिसमें एक मुस्लिम युवक मोहम्मद आलिम को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. एक हिंदू लड़की ने आरोप लगाया था कि उसने उसे इस्लाम कबूल करवाने के लिए धोखा दिया. बाद में लड़की ने कबूल किया कि उस पर यह आरोप लगाने के लिए उसके माता-पिता और स्थानीय हिंदुत्व संगठनों ने दबाव बनाया था. इसके बावजूद चैनल ने इस अपडेट का ज़िक्र किए बिना अपनी रिपोर्टिंग जारी रखी.
शिकायतकर्ता इंद्रजीत घोरपड़े ने क्या कहा?
ऑब्जर्वर पोस्ट की रिपोर्ट के हवाले से NBDSA के आदेश पर इंद्रजीत घोरपड़े ने कहा कि इन मामलों से पता चलता है कि कैसे स्व-नियामक (Self- Regulatory) ढांचा सांप्रदायिक प्रचार के लिए शक्तिशाली मीडिया घरानों को जवाबदेह ठहराने में विफल रहा है. प्राधिकरण ने दोनों चैनलों से आपत्तिजनक वीडियो हटाने को कहा, लेकिन कोई जुर्माना नहीं लगाया, जबकि उसके पास दो से पच्चीस लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का अधिकार है.

