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अमित शाह की बैठकों से मुस्लिम अफसरों को रखा गया दूर? महुआ मोइत्रा ने UN को पत्र लिखकर की ये बड़ी मांग

Mahua Moitra Letter UN Special Rapporteur: तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरों के दौरान मुस्लिम अधिकारियों को बैठकों से कथित तौर पर दूर रखने का आरोप लगाया है. उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप और भारत सरकार से जवाब मांगने की अपील की है. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें.

Mahua Moitra Letter UN Special Rapporteur: तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने जुलाई और अगस्त के महीने में अमित शाह के पश्चिम बंगाल दौरे और बॉर्डर सिक्योरिटी रिव्यू मीटिंग से मुस्लिम अधिकारियों को दूर रखने, मीटिंग अटैंड करने से रोकने का आरोप लगाते हुए संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक (Special Rapporteur) को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने लेटर में मांग की कि UN स्पेशल रैपोर्टियर मुस्लिम अधिकारियों को कथित तौर पर बाहर रखने पर भारत सरकार से जवाब मांगे; सरकार से यह पक्का करने की अपील करें कि किसी भी अधिकारी को धर्म के आधार पर सरकारी कामों से बाहर न रखा जाए और पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां ​​अल्पसंख्यक समुदायों के साथ बिना भेदभाव के पेश आएं.

दरअसल, बीते जुलाई और अगस्त महीने के दौरान अमित शाह का पश्चिम बंगाल में दो बार आना हुआ. इस दौरान अधिकारियों के साथ कई मीटिंग हुई. इस मीटिंग से मुस्लिम IAS और IPS अधिकारियों को दूर रखा गया और उन्हें आने से मना किया गया. इस बात का खुलासा करते हुए महुआ मोइत्रा ने बीते 1 सितंबर को सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी और भाजपा से सवाल की थी. लेकिन इस पोस्ट को लेकर महुआ मोइत्रा पर FIR हो गई. इसके लगभग दो हफ्ते बाद महुआ मोइत्रा ने बुधवार (16 सितंबर) को संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक (Special Rapporteur) को पत्र लिखा और भारत सरकार से जवाब मांगने की अपील की.

इस लेटर में सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस कमिश्नर, IPS सैयद वकार रजा; पश्चिम बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स के डायरेक्टर जनरल, IPS जावेद शमीम; और फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज डिपार्टमेंट के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, IAS खलील अहमद जैसे अधिकारियों के बारे में बताया गया है.

मोइत्रा के मुताबिक, शाह के 18 जुलाई के सिलीगुड़ी दौरे के दौरान, सैयद वकार रजा को बॉर्डर सिक्योरिटी रिव्यू मीटिंग से जाने के लिए कहा गया था, जिसमें करीब 18 पुलिस सुपरिटेंडेंट और डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट शामिल थे. उन्होंने कहा कि मीटिंग भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर बॉर्डर सिक्योरिटी पर चर्चा करने के लिए बुलाई गई थी और सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट पश्चिम बंगाल का एकमात्र पुलिस कमिश्नरेट है जो बांग्लादेश के साथ बॉर्डर शेयर करता है और सिलीगुड़ी कॉरिडोर पर इसका अधिकार क्षेत्र है.

मोइत्रा ने आगे आरोप लगाया कि शाह के दौरे के ऑफिशियल प्रोटोकॉल से रजा का नाम और पोस्ट हटा दिया गया था और उन्हें सी-ऑफ लाइन में न आने का निर्देश दिया गया था. लेटर में यह भी आरोप लगाया गया कि पश्चिम बंगाल STF के उस समय के DGP जावेद शमीम को सिलीगुड़ी बॉर्डर सिक्योरिटी मीटिंग में शामिल न होने के लिए कहा गया था.

19 जुलाई को लॉ एंड ऑर्डर और डिज़ास्टर की तैयारी पर मीटिंग के लिए शाह के कोलकाता दौरे के दौरान, मोइत्रा ने आरोप लगाया कि फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज़ डिपार्टमेंट के सबसे सीनियर ऑफिसर खलील अहमद को मीटिंग में पहुंचने के बाद जाने के लिए कहा गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शमीम को फिर से शामिल न होने के लिए कहा गया, जबकि STF को शर्मा ने रिप्रेजेंट किया.

मोइत्रा ने कहा कि 20 से 22 अगस्त तक शाह के पश्चिम बंगाल के दूसरे दौरे के दौरान भी ऐसा ही पैटर्न दोहराया गया। लेटर के मुताबिक, रज़ा को फिर से सिलीगुड़ी में बॉर्डर सिक्योरिटी रिव्यू में शामिल न होने के लिए कहा गया, जबकि शमीम को नए क्रिमिनल कानूनों पर एक ऑफिशियल एग्ज़िबिशन में हिस्सा लेने की इजाज़त नहीं दी गई.

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