Ziaul Haq Murder Case: 13 साल बाद अधिकारी जिया उल हक हत्याकांड मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला आया है. विशेष सीबीआई कोर्ट ने 19 सितंबर 2026 को इस मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया और सबूतों के अभाव में प्रतापगढ़ के कुंडा विधानसभा के विधायक राजा भैया समेत पांच लोगों को क्लीन चिट मिल गई है. जुया उल हक हत्यताकांड मामले में राजा भैया पर मुख्य साजिशकर्ता के रूप में मुकदमा दर्ज था. कोर्ट के इस फैसले से शहीद अधिकारी जिया उल हक के परिजनों में मायूशी है.
शहीद अधिकारी जिया उल हक के शमशुल हक और मां हाजरा खातून ने अपनी पीड़ा साझा की. पिता शमशुल हक ने कहा ‘जिन लोगों ने मेरे बेटे की हत्या का पूरा चक्रव्यूह रचा था, वे ही इस मामले से बरी हो गए. इससे बड़े दुख की बात हमारे लिए और क्या हो सकती है? अदालत के फैसले के सामने हम क्या ही कर सकते हैं. वहीं, इस मामले में साल 2024 में 10 आरोपियों को मौत की सजा सुनाई गई थी. इसको लेकर परिजनों ने कहा कि ससे उन्हें थोड़ी तसल्ली जरूर मिली है. लेकिन मुख्य साजिशकर्ताओं को सजा न मिलना उनके जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है.
गौरतलब है कि 2 मार्च 2013 की शाम करीब साढ़े सात बजे जमीन विवाद को लेकर प्रतापगढ़ के कुंडा के बलीपुर गांव के प्रधान नन्हे यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. घटना की जानकारी पर उनके समर्थक गांव पहुंचे और आरोपित के घर में आग लगा दी. स्थिति को संभालने के लिए कुंडा के तत्कालीन सीओ जियाउल हक पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. इस दौरान सीओ जियाउल हक और गुस्साए ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई. इस झड़प में गोली लगने से प्रधान के भाई सुरेश यादव की मौत हो गई. इस मौत से मामला और बिगड़ गया.
प्रधान के भाई सुरेश यादव की मौत से भीड़ उग्र हो गई और सीओ जियाउल हक को घेरकर उनकी पिटाई की और गोली मारकर हत्या कर दी. जियाउल हक की हत्या के बाद उनकी पत्नी परवीन आजाद ने चौथी एफआईआर में तत्कालीन कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह समेत पांच लोगों को नामजद किया था. लेकिन अब उन्हें विशेष सीबीआई कोर्ट से इस मामले में क्लीन चिट मिल चुकी है.
