Guwahati HC On Goalpara Bulldozer Action: असम में मुस्लिम समुदाय के घरों को अवैध बताकर किए जाने वाले बुलडोजर एक्शन रुकने का नाम नहीं ले रहा है. इसी कड़ी में बीते 7 सितंबर को असम के मुस्लिम-बहुल गोलपाड़ा ज़िले में 73 घरों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया, जबकि वे घर निजी जमीन पर बनाए गए थे. प्रशासन का इस कार्रवाई को लेकर तर्क है कि वे घर एग्रीकल्चर वाली जमीन पर बनाई थी. प्रशासन के द्वारा 5 सितंबर को जारी नोटिस को चुनौती देते हुए 21 निवासियों ने गुहाटी हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. नोटिस में 24 घंटे के अंदर संबंधित घरों को हटाने का निर्देश दिया गया था. याचिकाकर्ताओं के वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि 7 सितंबर की सुबह-सुबह घर गिरा दिए गए. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि मटिया सर्कल ऑफिसर की कार्रवाई पहली नज़र में “ग़ैर-कानूनी और अनधिकृत” और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करने वाली लग रही है.
गुवाहाटी हाई कोर्ट के जज देवाशीष बरुआ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए ने गोलपाड़ा ज़िले में 73 घरों पर हुए बलुडोजर कार्रवाई पर सवाल खड़े किए. जज देवाशीष बरुआ ने अधिकारियों से पूछा कि निजी ज़मीन पर इतनी सख़्त कार्रवाई करने के लिए कौन सा “तत्काल ख़तरा” था. जज ने कहा कि घर गिराए जाने से पहले निवासियों को अपना पक्ष रखने का उचित मौका नहीं दिया गया था. कोर्ट ने कहा कि प्रभावित लोगों को अपनी बात रखने का मौका दिए बिना ऐसे नोटिस जारी करना “आज के समय में बिल्कुल अकल्पनीय” है.
कोर्ट ने यह भी कहा कि नोटिस में ऐसा कोई “तत्काल ख़तरा” नहीं बताया गया था जो निजी ज़मीन पर इतनी सख़्त शक्तियों के इस्तेमाल को सही ठहरा सके. कोर्ट ने सरकारी वकील एस.एस. रॉय को अधिकारियों से जानकारी लेने और अगली सुनवाई में यह बताने का निर्देश दिया कि “ऐसा कौन सा तुरंत खतरा था” जिसके कारण घरों को तोड़ना पड़ा. कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को एक अतिरिक्त हलफ़नामा (एफ़िडेविट) दाखिल करने की भी इजाज़त दी, जिसमें तोड़-फोड़ और हुए आर्थिक नुकसान की पूरी जानकारी हो. इस मामले में अगली सुनवाई 11 सितंबर को होनी है. कोर्ट ने गोलपारा ज़िले के कमिश्नर और मटिया सर्कल ऑफ़िसर को निर्देश दिया कि 11 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक उस ज़मीन पर कोई और कार्रवाई न करें.

