Jamia Student Union Restoration: जामिया मिलिया इस्लामिया के एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए एक ऑर्डर निकाला गया है, जिसमें उन्होंने छात्रों की मांग को मानते हुए छात्र संघ बहाल करे की बात मानी. एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक छात्र संघ के नई संविधान को स्वीकृति मिलने के 15 दिनों के अंदर जामिया में छात्र संघ चुनाव कराए जाएंगे. लेकिन एडमिनिस्ट्रेशन के इस आदेश को प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्वीकार नहीं किया और भूख हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया. इस पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने एडमिनिस्ट्रेशन के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग बिल्कुल सही है. उन्होंने कहा कि जामिया अथॉरिटी का छात्रों की मांग के सामने जो रवैया है, वह बहुत गलत है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी
में छात्र संघ हो सकता है, दिल्ली यूनिवर्सिटी और अब अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में छात्र संघ हो सकते हैं, तो जामिया मिलिया इस्लामिया में क्यों नहीं?
उन्होंने कहा कि स्टूडेंट यूनियन जामिया के छात्रों का बुनियादी मुतालबा है और ये उनकी जरूरत भी है. उन्होंने कहा कि छात्रों की परेशानी को यूनिवर्सिटी के प्रशासन तक कौन लेकर जाएगा, स्टूडेंट यूनियन ही लेकर जाएगा. उन्होंने कहा कि जामिया में छात्र संघ पर रोक लगाना सही चीज नहीं थी. उन्होंने कहा कि छात्रों की मांग बहुत सीधी-सी है: बस एक तारीख तय कर दी जाए और घोषणा कर दी जाए कि उस तारीख तक छात्र चुनाव करा लिए जाएंगे.
उन्होंने कहा कि जामिया प्रशासन अभी जो कह रहा है, वह सही नहीं है. उनका कहना है कि संविधान बनने के 15 दिन बाद चुनाव कराए जाएंगे. लेकिन संविधान कब बनेगा? वे 15 दिन कब पूरे होंगे? इसमें एक-दो साल भी लग सकते हैं. इस बारे में कुछ भी तय नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि अगर जामिया प्रशासन को लगता है कि छात्र संघ का संविधान में तब्दीली करने में समय लग सकता है, तो पिछली संविधान पर आईए. उन्होंने कहा कि जामिया के छात्रों को दिल्ली यूनिवर्सिटी और जवाहरलाल नेहारू यूनिवर्सिटी के छात्र समर्थन देने आते हैं, तो उन्हें रोकने और धारा 163 लगाने की क्या जरूरत है.
