हिजाब से मना करें तो मुस्लिम लड़कियां पढ़ाई छोड़ दें: मुफ्ती नादिरुल कासमी

रिसर्च स्कॉलर मुफ्ती अहमद नादिरुल कासमी ने हिजाब पर अपनी बात रखते हुए कहा कि कट्टर हिंदू और आरएसएस की सोच रखने वाली शिक्षण संस्थाएं हिजाब पहनी मुस्लिम लड़कियों को कक्षाओं और परीक्षा हॉल में प्रवेश पर रोक लगा रही हैं, जो पूरी तरह से गलत है. उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए इस्लाम में असली पर्दा है और अगर शिक्षण संस्थान पर्दा या हिजाब से मना करते हैं तो ऐसी शिक्षा की कोई जरूरत नहीं है.

उन्होंने कहा कि यदि हिजाब वाली लड़कियों को शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश नहीं मिलता है तो मुस्लिम लड़कियों को परीक्षा छोड़ देनी चाहिए, भले ही उनका शैक्षणिक वर्ष बर्बाद हो. इस्लाम में पर्दा और नैतिकता पहले है यह बात उन्होंने ईटीवी भारत के साथ एक विशेष साक्षात्कार के दौरान कही.

उन्होंने कहा कि जिस तरह से परीक्षाओं के दौरान खबर आ रही है कि हिजाब में मुस्लिम छात्रों को परीक्षा हॉल में प्रवेश नहीं करने दिया जा रहा है, इसलिए मैं इन मुस्लिम बहनों और बेटियों को ऐसे संस्थानों से अलग होने और परीक्षा छोड़ने की सलाह देता हूं. पर्दा या हिजाब के साथ समझौता करने की कोई ज़रूरत नहीं है.

नादिरुल कासिमी ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फैसले से असहमति व्यक्त की है कि हिजाब इस्लाम का हिस्सा नहीं है. उन्होंने कहा कि इस्लाम में कुरान में महिलाओं के लिए स्पष्ट हिजाब का वर्णन है. इस्लाम में हिजाब और नैतिकता पर जोर दिया गया है. अगर मुसलमानों में ये दो चीजें मौजूद नहीं हैं, तो वे अपने बच्चों को ठीक से प्रशिक्षित नहीं कर सकते.

बता दें कि 15 मार्च को कर्नाटक उच्च न्यायालय ने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा था कि इस्लाम में हिजाब पहनना जरूरी नहीं है.

कर्नाटक हाई कोर्ट के मुताबिक इस्लाम में हिजाब को जरूरी नहीं माना गया है. कोर्ट ने हिजाब पहनने को लेकर दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था.

हिजाब विवाद मामले में फैसला सुनाते हुए कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा था कि स्कूल यूनिफॉर्म का प्रिस्क्रिप्शन एक उचित प्रतिबंध है, जिस पर छात्र आपत्ति नहीं कर सकता है.

कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के बाद, देश भर में कई शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनी मुस्लिम लड़कियों को परीक्षा हॉल में प्रवेश करने पर रोक लगा दी गई है और यह मामला बढ़ता ही जा रहा है. वहीं, अब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है जिसमें शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था.

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