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सुप्रीम कोर्ट ने असम के गोलाघाट में बेदखली अभियान पर लगाई अंतरिम रोक.. विस्थापन का सामना कर रहे परिवारों को बड़ी राहत

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि असम सराकर ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया, पुनर्वास या समुचित जांच के उन्हें बेदखल करने की कार्रवाई शुरू कर दी है, जो असम फॉरेस्ट रेगुलेशन, 1891 और फॉरेस्ट राइट्स एक्ट, 2006 के नियमों के खिलाफ है.

Supreme Court On Assam Bulldozer Action: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 22 अगस्त को असम के गोलाघाट जिले के उरियमघाट और आसपास के गांवों में चल रहे बेदखली और ध्वस्तीकरण अभियान पर अंतरिम रोक लगा दी. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से विस्थापन का सामना कर रहे सैकड़ों बंगाली मुस्लिम परिवारों को राहत मिली है.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा और अतुल एस चंदुरकर की बेंच ने यह आदेश पारित किया है. सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया. हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की अपील खारिज करते हुए प्रशासन द्वारा शुरू की गई बेदखली की कार्रवाई को सही ठहराते हुए बरकरार रखा था.

हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे

हाई कोर्ट ने लंबे समय से बसे लोगों को जबरन बेदखली से कोई राहत नहीं दी. इससे परेशन होकर याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. याचिका में कहा गया कि इन निवासियों में से कई पिछले 70 वर्षों से लगातार वहां रह रहे हैं.

‘असम सरकार ने कानून का पालन नहीं किया’

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि असम सराकर ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया, पुनर्वास या समुचित जांच के उन्हें बेदखल करने की कार्रवाई शुरू कर दी है, जो असम फॉरेस्ट रेगुलेशन, 1891 और फॉरेस्ट राइट्स एक्ट, 2006 के नियमों के खिलाफ है.

गोलाघाट में 2000 से अधिक बंगाली मुसलमानों के बेघर होने का खतरा

असम सरकार लगातार अतिक्रमण हटाने के नाम पर बुलडोजर कार्रवाई कर रही है. पिछले महीने जुलाई को गोलाघाट जिले में एक बार बुलडोजर कार्रवाई शुरू की गई है. इस कार्रवाई में 2000 से अधिक बंगाली मुसलमानों के बेघर होने का खतरा बना हुआ है.

इंडियन एक्सप्रेस के हवाले से अधिकारियों का अनुमान है कि गोलाघाट जिले के उरियमघाट क्षेत्र में रेंगमा रिजर्व फॉरेस्ट की लगभग 15,000 बीघा (करीब 4900 एकड़) जमीन को अतिक्रमण मुक्त किया जाएगा. यहां लगभग 2,700 परिवार रहते हैं, जिनमें ज्यादातर बंगाली मुसलमान हैं.

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