Neha Bora Peace Bond Case: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) द्वारा 10 हजार रूपये का पीस बॉन्ड भरने की नोटिस दिया गया था. थी और उन्हें इस पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर कराने के लिए SEM कोर्ट में पेश होने के लिए बुलाया गया था. लेकिन वह SEM कोर्ट के सामने पेश नहीं हुई और इस नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की. दिल्ली हाई कोर्ट ने संबंधित याचिका को बीते 23 अक्टूबर को खारिज कर दिया. इसके बाद नेहार बोरा ने 24 अक्टूबर को एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने यह साफ कह दिया है कि वह किसी पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर नहीं करेंगी.
नेहा बोरा ने कहा कि वह पीस बॉन्ड पर इस लिए हस्ताक्षर नहीं करेंगी, क्योंकि यह उनके लोकतांत्रिक अधिकारियों को छिनता है. उन्होंने शंका जताते हुए कहा कि आगे भी देश में कहीं भी प्रदर्शन करने वाले लोगों को रोकने के लिए पीस बॉन्ड का इस्तेमाल किया जाएगा. नेहा ने कहा कि जब इस लोकतंत्र में हमारे वोटिंग के अधिकार छीन लिए गए, तब हम लोग सड़कों पर उतरे. उन्होंने कहा कि आपने हमारे सारे प्रदर्शन देखा, जिसमें नारे लगे और लोग पोस्ट लेकर चले. इसके अलावा लोगों ने ऐसा कुछ नहीं किया, जिसे अलोकतांत्रिक कहा जा सके.
उन्होंने कहा कि जो भी प्रदर्शन और मार्च हुए वे सभी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक थे. उन्होंने कहा कि इन प्रदर्शनों के दौरान हमने कहीं हिंसा देखी, तो वह पुलिस द्वारा की गई थी. उन्होंने कहा कि प्रदर्श को संभालने के लिए तैनात किए गए सुरक्षा बल, कानून व्यवस्था बनाए रखने और हम लोगों को संभालने के बजाए लाठियों का इस्तेमाल किया, महिलाओं के कपड़े फाड़े गए. उन्होंने कहा कि मिडिया के लोग भी इस पूरे प्रोसेस के दौरान पुलिस द्वारा किए गए हिंसा से अच्छी तरह वाकिफ हैं.
गौरतलब है कि नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के मंडी हाउस इलाके से हिरासत में लिया गया. इसके एक दिन बाद उन्हें रिहा कर दिया गया. स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने नेहा बोरा को 10 हजार रुपये की पीस बॉन्ड भरने का नेटिस भेजा. नेहा ने इस नोटिस को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की. हालांकि कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया. अब नेहा इस याचिका को ऊपर की कोर्ट में चैलेंज करने की बात कह रही हैं.
