अल्लाह के रसूल (सल्ल.) का सामाजिक बहिष्कार
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
(अल्लाह दयावान, कृपाशील के नाम से)
प्रिय दर्शको,
अल्लाह के रसूल (सल्ल.) की पैग़म्बरी का सातवाँ साल था और क़ुरैश का विरोध बढ़ता जा रहा था, क्योंकि वे देख रहे थे कि सकारात्मक सोच और...
ظاہر میں تجارت ہے، حقیقت میں جُوا ہے
سود ایک کا لاکھوں کے لیے مرگِ مفاجات
ज़ाहिर में तिजारत है, हकीकत में जुवा है
सूद एक का लाखों के लिए मर्गे मुफाजात
Zaahir mein tijaarat hai, haqeeqat mein juwa hai
sood ek ka...
Umar Embraces Islam || Maulana Ejaz Ahmed Aslam || SADAA Times
हज़रत उमर (रज़ि.) का इस्लाम क़ुबूल करना
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
(अल्लाह दयावान, कृपाशील के नाम से)
प्रिय दर्शको, आज हम हज़रत उमर (रज़ि.) के इस्लाम स्वीकार करने के बारे में सुनेंगे। अल्लाह के रसूल...
जाफ़र तय्यार (रज़ि.) नज्जाशी के दरबार में
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
(अल्लाह दयावान, कृपाशील के नाम से)
प्रिय दर्शको, आप सबको मेरा प्यार भरा सलाम।
यह सन् 5 नबवी का ज़िक्र है— हिज्री साल का मतलब होता है कि नबी (सल्ल.) के हिजरत करने के बाद...
अब्दुल्ला-बिन-मसऊद (रज़ि.) का साहस
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
(अल्लाह दयावान, कृपाशील के नाम से)
प्रिय दर्शको, आप सबको मेरा प्यार भरा सलाम।
हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) की पैग़म्बरी का सातवाँ वर्ष था। इस्लाम का सन्देश लगातार फैलता जा रहा था और मक्का के बड़े लोग बहुत परेशान...
अल्लाह के रसूल (सल्ल.) का सौदेबाज़ी से इनकार
प्रिय दर्शको,
आज उत्बा-बिन-रबीआ, जो कि मक्का का एक बड़ा सरदार था, उससे जुड़ी कुछ बातें आपके सामने पेश की जाएँगी।
इस्लाम का सन्देश धीरे-धीरे फैलता जा रहा था। मक्का के बड़े-बड़े सरदार और...
نقش ہیں سب ناتمام، خونِ جگر کے بغیر
نغمہ ہے َسودائے خام، خونِ جگر کے بغیر
नक़श हैं सब नातमाम, ख़ूने जिगर के बग़ैर
नग़मा है सौदाए खाम, ख़ूने जिगर के बग़ैर
Naqsh hain sab naa-tamaam, khoon-e-jigar ke baghair
naghma hai saudaaye khaam, khoon-e-jigar...
Hamza Embraces Islam || Maulana Ejaz Ahmed Aslam || SADAA Times
हज़रत हमज़ा (रज़ि.) का इस्लाम क़ुबूल करना
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
(अल्लाह दयावान, कृपाशील के नाम से)
अल्लाहुम-म सल्ले अला मुहम्मदिवँ वला आले मुहम्मद व बारिक वसल्लम।
“ऐ अल्लह, रहमत (दयालुता) की बारिश कर मुहम्मद (सल्ल.)...
صورتِ شمشیٖر ہے دستِ قضا میں وہ قوم
کرتی ہے جوہر زماں اپنے عمل کا حساب
सूरते शमशीर है दस्ते क़ज़ा में वह क़ौम
करती है जो हर ज़मान अपने अमल का हिसाब
Soorat-e-shamsheer hai dast-e-qaza mein wo qaum
karti hai jo har zaman...
हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) के मुअज़्ज़िन बिलाल (रज़ि.)
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
(अल्लाह दयावान, कृपाशील के नाम से)
प्रिय दर्शको, आप सबको मेरा प्यार भरा सलाम।
हज़रत बिलाल (रज़ि.) हब्शा (इथोपिया) के रहनेवाले हब्शी अर्थात् अश्वेत नस्ल के थे। वह उमैया-बिन-ख़ल्फ़ के ग़ुलाम थे, जो मक्का का...